क्या है रियल वर्ल्ड?
कॉलेज खत्म होते होते मेरे कई दोस्त इंटर्नशिप और कई अच्छी फर्म में प्लेस्ड हो गए.उनके लिए खुशी तो हुई ही लेकिन अपने लिए काफी निराश हूं। ऐसी कितनी कमी रही होगी मेरे अंदर जो अभी तक मैं किसी भी जगह प्लेस्ड नहीं हो पाया शायद वर्तनी दोष..... नहीं। बालमुकुंद जी की विशेष कृपा रही थीं हम सबपे,तो क्या फिर हिंदी टाइपिंग? चलो मान लिया लेकिन नौ महीने में आप किसी भी इंसान को सुपरमैन वाली पावर तो नहीं दे सकते ना? मैं ये बिल्कुल भी नहीं कह रहा हूँ कि मैं ये नहीं सीखूंगा लेकिन थोड़ा समय तो बनता है बॉस....।
चलो एक कहानी बताता हूं,
एक माली एक पपीते का पेड़,एक आम का और एक नारियल का पेड़ अपने घर के बाड़ी (घर का बगीचा जहां साग सब्जी बोई जाती है) में लगाता है। माली ये सोचता है कि अगले साल से फल मिलना शुरू हो जाएगा. हुआ भी ऐसा ही।१ साल बाद सबसे पहले पपीते का लाभ उठाया। ऐसे ही ५ साल बाद आम और लगभग १२-१४ साल बाद नारियल का भी लाभ उठाएगा।अब अगर वो ऐसी जिद कर ले कि मुझे रोपाई के अगले साल ही आम या नारियल फल अपने पेड़ से चाहिए तो शायद ये नामुमकिन होगा।ऐसे ही किसी इंस्टीट्यूट में सभी विद्यार्थी एक जैसे नहीं होते।अलग अलग पृष्ठभूमि और अलग अलग बुद्धिमता से सुसज्जित लोग एक जैसे नहीं बन सकते।सबका टैलेंट अलग है।कोई जल्दी सीख लेता है तो कोई समय लेता है। मैं अपनी कमियों पर बिल्कुल भी पर्दा नहीं डाल रहा हूँ और ना ही उस पर गुरूर कर रहा हूं लेकिन ये शत् प्रतिशत कहता हूं कि सब सीखूंगा और जो सीखा है अपने से छोटों को सौंप भी दूंगा।
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